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एक सिर और कंधे पैटर्न क्या है?

एक सिर और कंधे पैटर्न क्या है?
(i) अब कई चारपाइयाँ हैं
(ii) अब सोने के लिए लकड़ी का एक सिर और कंधे पैटर्न क्या है? तख्नत है
(iii) अब चटाई पर लेटना पड़ता है
(iv) अब कोमल सेज है, परन्तु उस पर सोने की आदत न होने से नींद नहीं आती है

नातेदारी का अर्थ

समाज में मानव अकेला नहीं होता जन्म से ले कर मृत्यु तक वह अनेक व्यक्तियों से घिरा हुआ होता है। इसका संबंध एकाधिक व्यक्तियों से होता है, परंतु इनमें से सबसे महत्वपूर्ण संबंध उन व्यक्तियों के साथ होता है जो कि विवाह बंधन और रक्त संबंध के आधार पर संबंधित है। उसे ही हम साधारण शब्दों में नतेदारी कहते हैं।

1. मजूमदर और मदन के अनुसार- "इनका कहना है कि मनुष्य विभिन्न प्रकार के बंधनों के समूहों से बंधे हुए होते हैं। इन बंधनों में सबसे अधिक मौलिक बंधन है, जो की संतान उत्पत्ति पर आधारित है, और आंतरिक मानव प्रेरणा है, यही नातेदारी कहलाती है।"

2. लूसी मेयर के अनुसार -"लूसी मेयर का कहना है कि सामाजिक संबंधों को वैज्ञानिक शब्दों में व्यक्त किया जाता है।"

3. रैडक्लिफ ब्राउन के अनुसार ‌, -"उद्देश्यों के लिए स्वीकृत वंश व रक्त संबंध है जो कि सामाजिक संबंधों के परंपरात्मक संबंधों का आधार है।"

नातेदारी के प्रकार बताइए | नातेदारी कितने प्रकार के हैं

नातेदारी से संबंधित सभी व्यक्तियों को दो श्रेणियों में अलग किया जा सकता है जो कि इस प्रकार से है- अब यहाँ आपका सवाल आता है कि नातेदारी कितने प्रकार के होते हैं, नातेदारी दो प्रकार के होते हैं_

  1. रक्त संबंधी नातेदारी
  2. विवाह संबंधी नातेदारी

1. रक्त संबंधी नातेदारी- इसमें वे लोग आते हैं जो सामान रक्त के कारण एक-दूसरे से संबंधित होते हैं। उदाहरण के लिए माता पिता और उनके बच्चे अथवा भाई बहन समान रक्त से संबंधित होने के कारण रक्त संबंधी नातेदार होंगे। एक बच्चे ने उसके पिता दादा दादी मां नाना नानी आदि का रक्त होने की संभावना की जा सकती है तो वह सभी व्यक्ति उस बच्चे के रक्त संबंधी नातेदार होंगे। इसके बाद में या ध्यान रखना आवश्यक है कि विभिन्न रक्त संबंधियों के बीच वास्तविक रक्त एक सिर और कंधे पैटर्न क्या है? संबंध होना सदैव आवश्यक नहीं होता। बहुत सी स्थिति में रक्त संबंध कल अपनी कथा माना हुआ भी हो सकता है। उदाहरण के लिए नीलगिरी की पहाड़ियों पर रहने वाली टोडा जनजाति में एक स्त्री अनेक पुरुषों से विवाह करती है। ऐसी स्थिति में अज्ञात नहीं किया जा सकता कि उस स्त्री से जन्म लेने वाले बच्चे का वास्तविक पिता कौन है? जो पति संस्कार के द्वारा उसे धनुष बाण भेंट करता है, तो उसे जन्म लेने वाले बच्चे का पिता माना जाता है।

नातेदारी का महत्व | नातेदारी के सामाजिक महत्व की विवेचना करें

1. मानव शास्त्र के अध्ययन में उपयोगी- मानव शास्त्र एक स्वतंत्र विज्ञान है। इस विज्ञान के ज्ञान की प्राप्ति के लिए नातेदारी का ज्ञान आवश्यक है। इसके आधार पर समाज की संरचना को समझने में मदद मिलती है।

2. मानसिक संतुष्टि- नातेदारी के ज्ञान से व्यक्ति को मानसिक संतोष प्राप्त होता है। साथ ही व्यक्ति स्वयं को अकेला नहीं समझता है। उसका भी कोई अपना है ऐसा एहसास उसे अपने मस्तिष्क में होता है।

3. सामाजिक दायित्वों का निर्वाहन- मनुष्य सामाजिक प्राणी है। उसके अनेक सामाजिक दायित्व हैं इन दायित्वों के निर्वाहन में नातेदारी मदद करती है। रिश्तेदार पर्व त्यौहार तथा सांस्कृतिक कार्य में सम्मिलित होकर अपने दायित्वों का निर्वाह करते हैं।

4. आर्थिक सहयोग- सदस्यों का आर्थिक सहयोग प्रदान करने में भी नातेदारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नातेदारी व्यक्तियों को आर्थिक संकट से उबारती है।

Class 7 Hindi Grammar Chapter 33 अपठित गद्यांश

Class 7 Hindi Grammar Chapter 33 अपठित गद्यांश (Apathit Gadyansh). Learn here about how to answer the questions given in Unseen Passages and practice the passage for CBSE Exam 2022-2023. All the contents are in updated format to academic session 2022-2023 State boards and CBSE board students. अपठित गद्यांश are given here for practice, which provide a general idea about to give answer to the questions given on the basis of passages.

कक्षा 7 हिन्दी व्याकरण पाठ 33 अपठित गदयांश

कक्षा: 7 हिन्दी व्याकरण
अध्याय: 33 अपठित गदयांश

Class 7 Hindi Grammar Chapter 33 अपठित गद्यांश

अपठित गद्यांश किसे कहते हैं?

जो गद्यांश या पद्यांश पहले न पढ़े गए हों, जो आपकी पाठ्य पुस्तक से नहीं लिया गया हो, वे अपठित गद्यांश कहे जाते हैं। अपठित अंशों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर छात्रों को अपनी मौलिक बुद्धि और ज्ञान के आधार पर देने होते हैं। इसलिए इनका बार-बार अभ्यास करना चाहिए। ऐसा करना छात्रों को कुशल बनाता है।
अपठित गद्यांशों पर आधारित प्रश्नों का उत्तर देने से पहले निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए:

    • 1. सर्वप्रथम अपठित गद्यांश के मूलभाव को समझने के लिए उसे दो-तीन बार पढ़ना चाहिए।
    • 2. पूछे गए प्रश्नों को पढ़िए तथा गद्यांश में उनके संभावित उत्तरों को रेखांकित करते जाइए।
    • 3. यद्यपि पूछे एक सिर और कंधे पैटर्न क्या है? गए अधिकांश प्रश्नों का उत्तर गद्यांश में ही छिपा होता है, तथापि कुछ प्रश्नों के उत्तरों में थोड़ा-बहुत अपनी ओर से भी जोड़ना पड़ता है।
    • 4. प्रश्नों के उत्तर जहाँ तक संभव हों संक्षिप्त, सारगर्भित तथा अपनी भाषा में होने चाहिए।
    • 5. जितना पूछा गया है, उतना ही उत्तर देना चाहिए।
    • 6. शीर्षक चयन करते समय गद्यांश के प्रथम तथा अंतिम वाक्य को विशेष सावधानी से पढ़ना चाहिए।
    • 7. शीर्षक से दिए गए गद्यांश का मूलभाव और उद्देश्य स्पष्ट हो जाना चाहिए।

    (i) चादर और बनियान
    (ii) गमछा और टोपी
    (iii) मिर्जई और कम्बल
    (iv) शीश पर पगड़ी नहीं है, शरीर पर कुर्ता तक नहीं है

    (iv) शीश पर पगड़ी नहीं है, शरीर पर कुर्ता तक नहीं है।

    (i) कंस के घर का पता पूछ रहा था
    (ii) बलराम के घर का पता पूछ रहा था
    (iii) सेनापति के घर का पता पूछ रहा था
    (iv) सुदामा भगवान् कृष्ण के धाम का पता पूछ रहा था

    (iv) सुदामा भगवान् कृष्ण के धाम का पता पूछ रहा था।

    Q7. द्वार पर खड़े व्यक्ति की धोती कैसी थी?

    (i) छाले पड़ गए हैं
    (ii) ठोकर लगने से नाखून उखड़ गए हैं
    (iii) पैरों में जगह-जगह काँटे चुभे हुए हैं। कोई भी जगह काँटों से खाली नहीं है
    (iv) जूते पहनने के कारण पैर छिल गए हैं

    (iii) पैरों में जगह-जगह काँटे चुभे हुए हैं। कोई भी जगह काँटों से खाली नहीं है।

    Q9. बचपन में कृष्ण क्या करते थे?

    (i) मिश्री चुराते थे
    (ii) दही माँगते थे
    (iii) नृत्य करते थे
    (iv) मौज-मस्ती करते थे

    (i) गर्म पानी से
    (ii) साबुन और पानी से
    (iii) रगड़-रगड़कर
    (iv) कृष्ण जी ने आँसुओं से सुदामा के पैर धो दिये

    Q11. सुदामा मन भ्रमित होने पर क्या सोचने लगे ?

    (i) लगता है मैं गलत जगह आ गया हूँ
    (ii) सब लोग धोखेवाज और स्वार्थी हैं
    (iii) संसार में कोई किसी का मित्र नहीं है
    (iv) वे सोचने लगे-मैं कहीं रास्ता भूलकर फिर द्वारका में ही तो नहीं लौट आया हूँ

    (iv) वे सोचने लगे-मैं कहीं रास्ता भूलकर फिर द्वारका में ही तो नहीं लौट आया हूँ।

    रावण के दस सिर किस बात का प्रतीक हैं?

    रावण को 'दस एक सिर और कंधे पैटर्न क्या है? मुख' या यानी 10 सिर वाला भी कहा जाता है और यही कारण है कि उसको 'दशानन' कहा जाता है. साहित्यिक किताबों और रामायण में उनको 10 सिर और 20 भुजाओं के रूप में दर्शाया गया है. रावण, मुनि विश्वेश्रवा और कैकसी के चार बच्चों में सबसे बड़ा पुत्र था. उनकों छह शास्त्रों और चारों वेदों का भी ज्ञान एक सिर और कंधे पैटर्न क्या है? था. इसलिए ऐसा माना जाता है कि वह अपने समय का सबसे विद्वान् था. आइये एक सिर और कंधे पैटर्न क्या है? इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं कि रावण के दस सिर आखिर किस बात का प्रतीक हैं.

    What does Ravana ten heads symbolises?

    रावण लंका का रजा था जिसे दशानन यानी दस सिरों वाले के नाम से भी जाना जाता था. रावण रामायण का एक केंद्रीय पात्र है| उसमें अनेक गुण भी थे जैसे अनेकों शास्त्रों का ज्ञान होना, अत्यंत बलशाली, राजनीतिज्ञ, महापराक्रमी इत्यादि|

    भारतीय सेना की नई डिजिटल पैटर्न वाली लड़ाकू वर्दी हुई पेटेंट, जानिए क्या है इसकी खासियत

    by WEB DESK

    सेना दिवस पर सैनिकों को मिली नई डिजिटल पैटर्न वाली लड़ाकू वर्दी का भारतीय सेना ने पेटेंट करा लिया है। अब इस वर्दी का स्वामित्व पूरी तरह से भारतीय सेना के पास है, इसलिए नया डिजिटल पैटर्न वाला कपड़ा खुले बाजार में उपलब्ध नहीं होगा। अभी तक सैन्य अधिकारी और सैनिक बाजार से कपड़ा खरीदकर खुद ही वर्दी सिलवा सकते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सैन्य वर्दी पर सेना का एकाधिकार हो जाने से अवैध तरीके से बिक्री करने वालों को कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा।

    सैन्य प्रवक्ता ने बताया कि नई डिजिटल पैटर्न वाली लड़ाकू वर्दी के डिजाइन और ट्रेडमार्क का स्वामित्व हासिल करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस पंजीकरण को पेटेंट कार्यालय के आधिकारिक जर्नल (अंक संख्या 42/2022) में 21 अक्टूबर को प्रकाशित किया गया है। सैन्य वर्दी पर सेना का एकाधिकार हो जाने से अवैध तरीके से बिक्री करने वालों को कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा। भारतीय सेना वर्दी के डिजाइन को लेकर सक्षम नागरिक अदालत के समक्ष मुकदमे दायर कर सकती है। पेटेंट का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अंतरिम और स्थायी निषेधाज्ञा के साथ-साथ हर्जाना भी शामिल होगा।

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