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व्यापार मार्ग

व्यापार मार्ग
बता दें कि इस ग्रीन कॉरिडोर से व्यापार मार्ग भारत के जुड़ने के बाद भारत चीन के वन बेल्ट वन रोड को टक्कर दे सकेगी। इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंटरनैशनल इकनॉमिक फोरम में हिस्सा लेने जून में सैंट पीटर्सबर्ग जा रहे हैं। तब वह रूस में आईएनएसटीसी के एंट्री पॉइंट ऐस्ट्रकेन की यात्रा कर सकते हैं।

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भारतीय कंटेनर निगम लिमिटेड (कॉनकॉर) का गठन कम्पनी अधिनियम के अन्तर्गत मार्च, 1988 में हुआ और इसने भारतीय रेल के उस समय विद्यमान 7 अन्तर्देशीय कंटेनर डिपो को लेकर नवम्बर, 1989 में कार्य करना आरम्भ किया।

अपनी धीमी शुरूआत से लेकर अब यह नि:संदेह बाजार में अग्रणी है क्योंकि इसका भारत में 61 टर्मिनलों का सबसे बडा नेटवर्क है। कंटेनरों के लिए रेल मार्ग से अंतर्देशीय परिवहन उपलब्ध कराने के अतिरिक्त इसने अपने व्यवसाय का विस्तार भी पत्तन प्रबंधन, एयर व्यापार मार्ग कार्गो परिसरों और कोल्ड चेन स्थापना तक बढा लिया है।

अपने नवीनतम रेल वैगन बेडे, ग्राहकोन्मुख़ी वाणिज्यिक प्रक्रियाऑं और सूचना प्रौद्योगिकी के बृहद प्रयोग से यह कंपनी भारत में कंटॆनरीकरण के संवर्धन की भूमिका निभा रही है और आगे भी निरंतर निभाती रहेगी। कंपनी ने भारत के अंतरराष्ट्रीय और आंतरिक कंटेनरीकरण एवं व्यवसाय को बढावा देने हेतु बहुविध संभारतंत्र विकसित किया है। यद्यपि हमारी परिवहन योजना में रेल मार्ग कंपनी का मुख्य आधार है तथापि द्वार से द्वार तक व्यापार मार्ग सेवाओं की पूर्ति हेतु सडक सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं, भले ही वे अंतरराष्ट्रीय या आंतरिक व्यवसाय से जुडी हों।

भारत ने किस देश के साथ नया व्यापार मार्ग खोला है?

Explanation : भारत ने भूटान के साथ नया व्यापार मार्ग पश्चिम बंगाल में जयगांव और भूटान के पासाखा के बीच व्यापार मार्ग खोला है। जयगांव और अहल्ये व पसाखा के बीच यह कदम महामारी के इस दौर में काफी अहम साबित होगा। अस्थायी वैकल्पिक व्यापार मार्ग से माल की आवाजाही दोनों देशों के बीच काफी सुगम हो जाएगी। इसके अलावा भारत सरकार द्वारा 15 जुलाई को अहल्ये, पसाखा में एक अतिरिक्त सीमा शुल्क स्टेशन व्यापार मार्ग खोला गया है। औद्योगिक कच्चे माल की आवाजाही के लिए पसाखा इंडस्ट्रियल एस्टेट और माल की आवाजाही के लिए यह नया मार्ग द्विपक्षीय व्यापार और वाणिज्य तो बढ़ाएगा ही, साथ ही जयगांव मार्ग पर वाहनों के आवागमन भी कम करेगा। भूटान भारत (Bhutan India) का निकटतम साझेदार और मित्र है और जयगांव और भूटान के पासाखा के बीच नया व्यापार मार्ग (व्यापार मार्ग Trade route) द्विपक्षीय रिश्तों में व्यापक बदलाव लाएगा।. अगला सवाल पढ़े

रूस-भारत के बीच रेल-सड़क मार्ग से व्यापार

रूस-भारत के बीच रेल-सड़क मार्ग से व्यापार

भारत ने ईरान के रास्ते रूस और यूरोप से जोड़ने की परियोजना को अमलीजामा पहनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है।

भारत ने इंटरनैशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्टेशन कॉरिडोर (INSTC) के तहत सीमा शुल्क की आसान सुविधा वाले ग्रीन कॉरिडोर के जरिए जल्द ही सामानों की आवाजाही का पूर्वाभ्यास किया जाएगा।

इसकी शुरूआत भारत और रूस के बीच राजनयिक सबंधों की 70वीं वर्षगांठ के मौके पर इस महीने के अंत तक हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा जब पूर तरह संचालन में आ जाएगा तो भारत और रूस के बीच समानों की आवाजाही में लगने वाले समय और लागत में भी कमी आएगी।

, के अनुसार इस रूट पर समय और लागत में कमी के साथ भारत को आर्थिक रूप से संपन्न रूस के साथ-साथ यूरोप के बजारों में भी भागेदारी बढ़ जाएगी।

व्यापार मार्ग

नौभार (कार्गो) के लाने-ले जाने के लिये प्रयुक्त मार्गों के नेटवर्क को व्यापार मार्ग (trade route) कहते हैं। कुछ प्रसिद्ध व्यापार मार्ग ये थे, अम्बर माभारत रोमन पाठ , मसाला मार्ग , पुर्तगालियों द्वारा खोजा गया यूरोप से भारत पहुँचने का समुद्री मार्ग , रेशम मार्ग, रोमन-भारत मार्ग , ग्रैंड ट्रंक रोड आदि।

इन्हें भी देखें

  • अम्बर रोड
  • Hærvejen
  • Incense Route
  • Kamboja-Dvaravati Route
  • King's Highway
  • शाही मार्ग
  • नमक मार्ग
  • साइबेरिया मार्ग
  • चाय मार्ग
  • Varangians to the Greeks
  • Via व्यापार मार्ग Maris
  • Triangular trade
  • Volga trade route
  • Trans-Saharan trade
  • Old व्यापार मार्ग Salt Route
  • Maritime Republics
  • Hanseatic League

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इंदौर के सुभाष मार्ग के व्यापार मार्ग व्यापारी दहशत में, व्यापार हो रहा प्रभावित

इंदौर के सुभाष मार्ग के व्यापारी दहशत में, व्यापार हो रहा प्रभावित

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सुभाष मार्ग के व्यापारी इन दिनों दहशत में हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इस मार्ग पर चौड़ीकरण की मुहिम चलाई जाना है। दुकानों पर ग्राहक नहीं बल्कि निगम के अधिकारियों का पहुंचना जारी है। कभी सेंट्रल लाइन के लिए कवायद हो रही है तो कभी चौड़ीकरण की जद में आ रही दुकानों की नप्ती को लेकर। बताया जा रहा है कि 10 से 25 फीट तक निर्माण प्रभावित होना है। कई मकान और दुकानें ऐसे भी हैं जो पूरी तरह से जद में आ रहे हैं।

किसी अधिकारी की गाड़ी रूकती है तो व्यापारियों की सांसें ऊपर-नीचे होने लगती है। वे अधिकारियों को घेरकर सवालों की झड़ी लगा देते हैं। किसी को समझ नहीं आ रहा कि आखिर हो क्या रहा है। सालों से लंबित इस मार्ग के चौड़ीकरण के काम में अचानक इतनी तेजी कैसे आ गई। व्यापारियों ने बताया कि वे चौड़ीकरण के खिलाफ नहीं हैं लेकिन सिर्फ इतना चाहते हैं कि 100 फीट के बजाय 80 फीट चौड़ी सड़क बनाई जाए। ऐसा होता है तो कई मकान और दुकानें तोड़फोड़ से बच जाएंगे। दुकानें भले ही छोटी हो जाए लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं होगी। व्यापार भी कम प्रभावित होगा। व्यापारियों और रहवासियों ने निगम की कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा भी खोल दिया है।

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