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कुशल बाजार

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  • खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य पुन:प्राप्‍ति प्रक्रिया) विनियम, 2017 के लिए यहां क्‍लिक करें size:( 1.22 MB)
  • खाद्य पुन:प्राप्‍ति के लिए दिशा-निर्देशों के लिए यहां क्‍लिक करें (28.11.2017 को अपलोड किया गया) size:( 0.34 MB)
  • पुन: प्राप्‍ति दिशा-निर्देशों के कार्यान्‍वयन के संबंध में उद्योग के हितधारियों के साथ 01 फरवरी, 2018 को आयोजित बैठक का कार्यवृत्‍त size:( 0.85 कुशल बाजार MB)
  • 200 खाद्य कंपनियों द्वारा पुन: प्राप्‍ति दल और पुन: प्राप्‍ति योजना के प्रस्‍तुतिकरण के बारे में जारी किया गया पत्र size:( 6.41 MB)

कुशल बाजार

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Food Fortification Edible Oil Fortification Milk Fortification Rice Fortification Wheat कुशल बाजार Flour Fortification Double Fortified Salt Fortified Products

एफ.एस.एस. अधिनियम, 2006 की धारा 28(1) में विनिर्दिष्‍ट है कि यदि कोई खाद्य कारोबारी यह मानता है या उसका यह विश्‍वास है कि कोई खाद्य जो उसने प्रसंस्‍कृत किया है, विनिर्मित किया है या संवितरित किया है, इस अधिनियम अथवा इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों या विनियमों के अनुपालन में नहीं है, तो वह तुरन्‍त प्रश्‍नाधीन खाद्य से बाजार और उपभोक्‍ताओं से खाद्य की पुन: प्राप्‍ति करने के लिए कारणों का उल्‍लेख करते हुए खाद्य की पुन: प्राप्‍ति करने के लिए प्रक्रिया प्रारंभ करेगा और इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी को सूचित करेगा।

पुन:प्राप्‍ति को कुशल बाजार खाद्य श्रृंखला के किसी भी चरण से खाद्य उत्‍पादों को हटाने के लिए की जाने वाली किसी कुशल बाजार कार्रवाई के रुप में परिभाषित किया जा सकता है जिसमें उपभोक्‍ता के धारणाधिकार में ऐसे खाद्य पदार्थ जिनसे लोक स्‍वास्‍थ्‍य को कोई खतरा हो अथवा जिनसे अधिनियम अथवा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों अथवा विनियमों का उल्‍लंघन होता हो, सम्‍मिलित है। खाद्य उत्‍पादों की पुन:प्राप्‍ति उद्योग, सरकार के सामान्‍य और उपभोक्‍ता के विशेष हित में है। पुन: प्राप्‍ति उपभोक्‍ताओं को समान रुप से संरंक्षणप्रदान करने में सक्षम है लेकिन सामान्‍यतया यह औपचारिक रुप से से किए जाने वाले प्रशासनिक अथवा सिविल प्रकार की कार्रवाई करने की तुलना में अधिक कुशल और सामयिक कार्रवाई है विशेषरुप से जब खाद्य उत्‍पाद व्‍यापक वितरण हो गया हो।

  • खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य पुन:प्राप्‍ति प्रक्रिया) विनियम, 2017 के लिए यहां क्‍लिक करें size:( 1.22 MB)
  • खाद्य पुन:प्राप्‍ति के लिए दिशा-निर्देशों के लिए यहां क्‍लिक करें (28.11.2017 को अपलोड किया गया) size:( 0.34 MB)
  • पुन: प्राप्‍ति दिशा-निर्देशों के कार्यान्‍वयन के संबंध में उद्योग कुशल बाजार के हितधारियों के साथ 01 फरवरी, 2018 को आयोजित बैठक का कार्यवृत्‍त size:( 0.85 MB)
  • 200 कुशल बाजार कुशल बाजार खाद्य कंपनियों द्वारा पुन: प्राप्‍ति दल और पुन: प्राप्‍ति योजना के प्रस्‍तुतिकरण के बारे में जारी किया गया पत्र size:( 6.41 MB)

कुशल लिमिटेड

कुशल लिमिटेड (Kushal) ट्रेडिंग और वितरण क्षेत्र की कंपनी है। कंपनी का कुल मूल्यांकन (मार्केट वैल्यू) ₹55 करोड़ है। कंपनी के एक शेयर की कीमत बीएसई बाजार में आज ₹2.25 है और एनएसई बाजार में आज लिस्टेड नहीं है। कंपनी की स्थापना वर्ष 2000 में की गई थी।

कंपनी द्वारा प्रदान की गई रिपोर्ट के अनुसार अंतिम वर्ष की कुल आय 361.613 करोड़ रुपये रही तथा कुल बिक्री 358.686 करोड़ रुपये रही । कंपनी का शुद्ध लाभ 13.307 करोड़ रुपये रहा। कुशल लिमिटेड ने चालू वर्ष में -0.563 करोड़ रुपये टैक्स का भुगतान किया हे।

Tags: Kushal Share Price, एनएसई लिस्टेड नहीं, कुशल लिमिटेड Share Price, एनएसई कुशल लिमिटेड

नौकरियों तो हैं, लेकिन कुशल कर्मचारियों की कमी से जूझ रही हैं कंपनियां, पूरे नहीं हो पा रहे कुशल बाजार टार्गेट

मैनपावर की कमी के कारण कंपनियां अपना टार्गेट को पूरा नहीं कर पा रही हैं.

मैनपावर की कमी के कारण कंपनियां अपना टार्गेट को पूरा नहीं कर पा रही हैं.

मैनपावर की कमी के कारण कंपनियां अपना टार्गेट पूरा नहीं कर पा रही हैं. यही नहीं कर्मचारियों की कमी से टैलेंट एक्विजिशन क . अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated : August 24, 2022, 11:39 IST

हाइलाइट्स

कई अहम सेक्टर्स में फिलहाल स्किल्‍ड और सेमी स्किल्‍ड लेबर की 10 से 15 फीसदी की कमी है.
कर्मचारियों की कमी से टैलेंट एक्विजिशन कॉस्‍ट भी बढ़ गया है. कंपनियों को अधिक पेमेंट करनी पड़ रही है.
ड्राइवर, सुरक्षा गार्ड, हाउसकीपर, मशीन ऑपरेटर, वेल्डर, फिटर और इलेक्ट्रिशियन की ज्‍यादा कमी है.

नई दिल्‍ली. कोरोना महामारी के बाद देश में बिजनेस की गति‍विधियां जोर पकड़ रही हैं, लेकिन कुशल कर्मचारियों की कमी की वजह कुशल बाजार से कंपनियां अपने टार्गेट पूरे नहीं कर पा रही हैं. मेन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, रियल एस्टेट, इन्फ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, रिटेल, ऑटोमोबाइल व ऑटो कंपोनेंट, रेस्तरां और फैसिलिटी मैनेजमेंट सहित लगभग सभी क्षेत्र कुशल श्रमिकों की 15-30 प्रतिशत की कमी का सामना कर रहे हैं.

इकोनॉमिक टाइम्‍स की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्कफोर्स मैनेजमेंट प्‍लेटफॉर्म बेटरप्‍लेस के चीफ एग्जिक्‍यूटिव प्रवीन अग्रवाल का कहना है कि स्किल्ड मैनपावर की कमी के कारण कंपनियां अपना टार्गेट पूरा नहीं कर पा रही हैं. यही नहीं, कर्मचारियों की कमी से टैलेंट एक्विजिशन कॉस्‍ट भी बढ़ गया है, क्‍योंकि कंपनियों को कर्मचारियों को लुभाने के लिए इंसेंटिव और वन टाइम पेमेंट देना पड़ रहा है.

बढ़ रही है कर्मचारियों की मांग
कंपनी एग्जिक्‍यूटिव्‍स का कहना है कि आने वाले त्‍योहारी सीजन में मांग में और इजाफा होने का अनुमान है. कोरोना महामारी के बाद अब कंपनियां निरंतर अपने ऑफिस खोल रही हैं और सर्विस एक्टिविटीज़ तेजी पकड़ रही हैं. लेकिन, अब कुशल कर्मचारियों की कमी के रूप में एक नई समस्‍या कंपनियों के सामने खड़ी हो गई है. टीमलीज़ सर्विसेज के को-फाउंडर रितुपर्णा कुशल बाजार चक्रवर्ती का कहना है कि वैल्‍यू चेन में क्‍वालिटी ऑफ जॉब इम्‍प्रूव हुआ है. यही कारण है कि अब स्किल्‍ड मैनपावर की कमी का सामना इंडस्‍ट्री को करना पड़ रहा है.

खर्च में हुई बढ़ोतरी कुशल बाजार
आरपीजी ग्रुप की कंपनी केईसी इंटरनेशनल के मैनेजिंग डायरेक्‍टर विमल केजरीवाल का कहना है कि कंपनी के विभिन्‍न प्रोजेक्‍ट्स साइट्स पर करीब 30,000 कर्मचारी काम कर रहे हैं. लेकिन हमारे पास फिलहाल स्किल्‍ड और सेमी स्किल्‍ड लेबर की 10 से 15 फीसदी की कमी है. केजरीवाल का कहना है, “हमारी रिसोर्स मोबिलाइजेशन कॉस्‍ट बढ़ गई है और लोगों को अपने साथ जोड़े रखने के लिए हमें इंसेटिव देने पड़ रहे हैं. डिमांड और सप्‍लाई में बहुत अंतर है.”

इन कर्मचारियों की ज्‍यादा कमी
फूड सर्विसेज और फैसिलिटी मैनेजमेंट फर्म सोडेक्‍सो (sodexo) के इंडिया डायरेक्‍टर प्रदीप चावड़ा का कहना है- “पहले जहां हम किसी क्‍लाइंट को उपलब्‍ध कराए गए कर्मचारी को 6-7 दिन में बदलते थे, वहीं अब ऐसा हम 10 दिन में कर रहे हैं. ऐसा कर्मचारियों की कमी के कारण हो रहा है.” चावड़ा का कहना है कि फूड और फैसिलिटी मैनेजमेंट बिजनेस में 22-30 फीसदी टैलेंट शॉर्टेज है. इस वजह से मानव संसाधन खर्च 12 फीसदी बढ़ गया है. वेयरहाउस एग्जिक्‍यूटिव्‍स, ड्राइवर, सुरक्षा गार्ड, हाउसकीपर, मशीन ऑपरेटर, वेल्डर, बढ़ई, वेयरहाउस कर्मचारी, फिटर और इलेक्ट्रीशियन की ज्‍यादा कमी है.

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वर्तमान उद्घाटन

Ms. Zohra Chatterji, Secretary, MoT & Mr. A.K. Chakraborty, CMD, JCI on the occassion of MOU signing on 24th March,2014 कुशल बाजार in New Delhi.

Ms. Zohra Chatterji, Secretary, MoT & Mr. A.K. Chakraborty, CMD, JCI on the occassion of MOU signing on 24th March,2014 in New Delhi.

Ms. Zohra Chatterji, Secretary, MoT, Mr. Sujit Gulati, Joint Secretary, MoT, Mr. A.K. Chakraborty, CMD, JCI & Mr. A. Chatterjee, DFM, JCI on the occassion of MOU signing on 24th March,2014 in New Delhi.

Ms. Zohra Chatterji, Secretary, MoT, Mr. Sujit Gulati, Joint Secretary, MoT, Mr. A.K. Chakraborty, CMD, JCI & Mr. A. Chatterjee, DFM, JCI on the occassion of MOU signing on 24th March,2014 in New Delhi.

Mr. A.K. Chakraborty, CMD, JCI inaugurating Farmers' Information Center at Champadanga

Mr. A.K. Chakraborty, CMD, JCI with other officers checking storage facility at Champadanga DPC

Mr. A.K. Chakraborty, CMD, JCI with other visitors checking an equipment at Champadanga

Newly Developed DPC Building at Talma under JTM MM-III

Storage Premises of Newly Developed DPC at Talma under JTM MM-III

Newly Installed Jute Testing Equipment at Talma under JTM MM-III

Visiting Delegates at Inauguration of Talma DPC

Newly Developed Market Yard at Kharupetia under JTM MM-III

Installed Bale Press Machine at Kharupetia Market Yard under JTM MM-III

Dr. R.C. Tiwari, Ex-CMD, JCI, Demonstrates Jute Testing Equipment to Visiting Delegates

Ms. Pramila Rani Brahma, Cabinet Minister of Agriculture and Welfare of Plains Tribes & Backward Classes, Government of Assam, India, is giving speech to audience

Bale Press Machine

Raw Jute in Bale form

सम्बंधित लिंक्स

भारतीय पटसन निगम लिमिटेड में स्वारगत है

निगम संबंधी जानकारी

भारतीय पटसन निगम लिमिटेड (जेसीआई) 1971 में जूट किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा एक आधिकारिक एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया था और कच्चे जूट क्षेत्र में सहायता हाथ के रूप में भी काम किया है।

जेसीआई को भारत सरकार द्वारा जूट उत्पादकों के कल्याण के लिए स्थापित किया गया था, उदाहरण के लिए, उनसे कुछ निश्चित धनराशि प्रदान की गई थी जिसके तहत वे अपने स्वयं के जूट के जूट क्षेत्र को प्राप्त कर सकते हैं। शुरुआत में जेसीआई को पहली बार एक छोटी सी आधिकारिक एजेंसी के रूप में शुरू किया गया था लेकिन फिर धीरे-धीरे यह अपने नेटवर्किंग का विस्तार कर चुका है और अब सात राज्यों में लगभग जूट के बढ़ने के लिए सफलतापूर्वक फैल गया है। भारत में बढ़ रहे जूट के लिए प्रसिद्ध राज्यों में पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, मेघालय, त्रिपुरा, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश शामिल हैं।

अध्यक्ष की कलम से

आपके निगम की 47 वीं वार्षिक आम बैठक के अवसर पर, भारतीय पटसन निगम लिमिटेड के निदेशक मंडल की ओर से आप सभी का स्वागत करते हैं।

मैं आप सभी के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं ताकि आप अपने समय-सारिणी की बैठक में भाग लेने के लिए इसे सुविधाजनक बना सकें।

अब, मैं आपके निगम के प्रदर्शन के दौरान एक सटीक प्रस्तुतीकरण करना चाहता हूं वित्तीय वर्ष 2017-2018 निम्नलिखित क्षेत्रों पर छूटे:

जूट प्रौद्योगिकी मिशन (मिनी मिशन-III)

जूट सेक्टर में विशेष रूप से सामान्य और पूर्वी क्षेत्र में देश की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण स्थान है। भारत में जूट क्षेत्र के समग्र विकास के लिए भारत सरकार ने जूट प्रौद्योगिकी मिशन (जेटीएम) शुरू किया है। वस्त्र मंत्रालय ने जूट निगम के समग्र मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण के तहत मिनी मिशन -3 के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में जूट निगम लिमिटेड को नामित किया है। इस मिनी मिशन -3 के जनादेश का विकास और मौजूदा मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर के उन्नयन और किसानों को सुविधाएं प्रदान करने के जरिए कच्चे जूट के लिए कुशल बाजार संबंधों और मूल्य में वृद्धि को सुनिश्चित करना है।

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