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ETF का इतिहास

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गोल्ड ETF से डिजिटल सोने को मिली चमक, निवेश को मिला बढ़ावा, जानें कैसे

गोल्ड ईटीएफ ने भौतिक रूप में की गई खरीदारी की तुलना में अधिक लाभ देकर डिजिटल गोल्ड में निवेश को बढ़ावा दिया है. इन ईटीएफ को खुले बाजार में शेयरों की तरह खरीदा और बेचा ETF का इतिहास जा सकता है, और बिना किसी अतिरिक्त लागत के डीमैट खातों में संरक्षित किया जा सकता है.

हैदराबाद : हाल के दिनों में, गोल्ड ईटीएफ (Exchange Traded Funds) ने भौतिक धातु की तुलना में निवेशकों को अधिक लाभ देकर डिजिटल सोने (Digital gold) में निवेश को बढ़ावा दिया है. सोना एक ऐसा धातु है, जो सदियों से अपने भौतिक रूप में किसी भी आर्थिक संकट का सामना करने की अपनी क्षमता साबित करता आया है. अब, अपने डिजिटल रूप में, सभी वर्गों के लोगों को विश्वास के साथ निवेश करने के लिए अधिक अवसर प्रदान करके सोना और भी मजबूत होकर उभर रही है.

हर शुभ अवसर या त्योहार के लिए लोग सोना खरीदते हैं. इसके सजावटी मूल्य और एक योग्य निवेश के रूप में इसका अधिक महत्व है. पूरी दुनिया सोने को एकमात्र निवेश साधन के रूप में मानती है जो महंगाई का सामना कर सकता है. वे दिन गए जब केवल अमीर ही कीमती धातु में निवेश कर सकते थे. आजकल, कंपनियां सोने में छोटे निवेश करने के अवसर प्रदान कर रही हैं. इसके तहत गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (Gold ETF) को अच्छा संरक्षण मिल रहा है. जानिए, इसमें आपको किन फायदों का इंतजार है.

आम धारणा यह है कि सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितताओं को दूर करने के लिए सोने का निवेश सुरक्षित है. भले ही वे किसी विशेष अवधि में किसी देश की अर्थव्यवस्था को कितनी बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं. इतिहास पर एक नजर डालने से पता चलता है कि कैसे सोना स्थिर रहा और हर संकट का सामना करके सुनिश्चित रिटर्न दिया है.

दशकों से, सोने को उसके मूल्य के लिए धन के प्रतीक के साथ-साथ एक विश्वसनीय निवेश के रूप में मान्यता मिली है. एक और आकर्षक विशेषता इसकी आसान लिक्विडिटी है. सोने को सिक्योरिटी के तौर पर इस्तेमाल कर हम कहीं भी आसानी से लोन प्राप्त कर सकते हैं. इन विविध कारणों से, लोग एक तरफ सीधे इसे खरीदकर और डिजिटल गोल्ड बॉन्ड या ईटीएफ का विकल्प चुनकर, सोने में तेजी से निवेश कर रहे हैं.

निवेश पोर्टफोलियो में विविधता की तलाश करने वालों को पहले सोने के निवेश की ओर देखना चाहिए. लंबी अवधि के निवेश पर इक्विटी से अच्छा रिटर्न मिल सकता है. लेकिन निवेशकों के लिए केवल एक प्रकार के निवेश को चुनना उचित नहीं है. जोखिम कारक तभी कम होगा जब निवेश में विविधता होगी, जिससे हाई रिटर्न भी सुनिश्चित होगा. बाजार के पतन के समय में, बॉन्ड सुरक्षा देता है. जब बाजार में उछाल होता है, तो इक्विटी अधिक लाभ प्रदान करती है.

पिछले अनुभव से पता चलता है कि कैसे मंदी के समय में सभी प्रकार के निवेशों ने प्रतिकूल परिणाम दिखाए हैं. हालांकि, सोना इसका अपवाद है. 2008 की वैश्विक मंदी में, शेयरों, हेज फंड, रियल्टी, वस्तुओं और सभी निवेशों पर प्रतिकूल प्रतिक्रिया आई है. हालांकि, दिसंबर 2007 से फरवरी 2009 तक की सबसे कठिन अवधि के दौरान केवल सोना ही इस प्रभाव का सामना कर पाया. यही कारण है कि स्थिरता के लिए किसी के निवेश पोर्टफोलियो में सोने को शामिल किया जाना चाहिए.

भारतीय निवेशकों के पास सोने की कई तरह की योजनाओं को चुनने का अवसर है. वे व्यवस्थित और लंबी अवधि के निवेश के लिए गोल्ड ईटीएफ देख सकते हैं. गोल्ड ईटीएफ यूनिट भारतीय बाजारों में सोने की दरों को दर्शाती हैं. जब ये ईटीएफ खरीदे जाते हैं, तो इसका मतलब है कि डीमैट खातों में सोना डिजिटल रूप में होता है. प्रत्येक गोल्ड ईटीएफ यूनिट के लिए बैकअप के रूप में भौतिक सोना होता है. हम इन गोल्ड ईटीएफ यूनिट को खुले बाजार में शेयरों की तरह ही खरीद और बेच सकते हैं.

म्यूचुअल फंड द्वारा उपलब्ध कराए गए गोल्ड ईटीएफ में व्यय अनुपात कम होता है. मेकिंग या वेस्टेज चार्जेस का कोई खतरा नहीं होता है. बिना सीधे सोना खरीदे कोई भी व्यक्ति सुरक्षा और रिटर्न का लाभ उठा सकता है. व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) भी सोने के निवेश की पेशकश करती है. ऐसी योजनाएं मूल्य में उतार-चढ़ाव के जोखिम के बिना सुनिश्चित औसत रिटर्न प्रदान करती हैं.

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Gold exchange traded funds

गोल्ड ईटीएफ्स

गोल्ड ई टी एफ एक एक्स्चेन्ज ट्रेडेड फन्ड (ई टी एफ) है जिसका उद्देश्य डोमेस्टिक फ़िज़िकल गोल्ड प्राईज की नियमित जानकारी रखना है।

एक गोल्ड ई टी एफ युनिट एक ग्राम गोल्ड के बराबर होती है और इसमें उत्तम शुद्धता का फ़िज़िकल गोल्ड होता है। गोल्ड ई टी एफ को नैशनल स्टॉक एक्स्चेन्ज ऑफ इन्डिया (एन एस ई) और बॉम्बे स्टॉक एक्स्चेन्ज लिमिटेड (बी एस ई) में लिस्टेड किया गया है और किसी भी अन्य कंपनी के सिंगल स्टॉक की तरह इसकी ट्रेडिंग होती है। गोल्ड ई टी एफ को खरीदने का अर्थ है आप गोल्ड को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में खरीद रहे हैं। आप जैसे स्टॉक्स में ट्रेड करते हैं, वैसे ही गोल्ड ई टी एफ को खरीद या बेच सकते हैं। जब आप वास्तव में गोल्ड ई टी एफ को रिडीम करते हैं, तब आपको फ़िज़िकल गोल्ड नही मिलता लेकिन उसके मूल्य की नकद राशि मिलती है। अगर आप गोल्ड में ई टी एफ के ज़रिए निवेश करना चाहते हैं तो इस बात की पुष्टि कर लें कि वह पूरी तरह से फ़िज़िकलि बैक्ड ई टी एफ है।

गोल्ड ई टी एफ की ट्रेडिंग एक डीमटेरियलाईज़ड अकाउन्ट (डीमैट) और ब्रोकर के माध्यम से होती है जो गोल्ड का इलेक्ट्रॉनिक इन्वेस्टमेन्ट सरल बनाते हैं।

यह कैसे काम करता है?

  • प्योरिटी और प्राईज़:
    इसमें गोल्ड की प्योरिटी को लेकर किसी प्रकार की चिन्ता करने की ज़रुरत नहीं होती क्योंकि ये ETF का इतिहास फन्ड्स 99.5% प्योर गोल्ड को दर्शाते हैं। गोल्ड ई टी एफ की प्राईज़ेस एनएसई की वेबसाइट पर दी जाती हैं और इन्हें ब्रोकर के द्वारा कभी भी बेचा या खरीदा जा सकता है। यहां पर एक बात ध्यान में रखने लायक यह है कि ज्वेलरी से थोड़ा अलग, गोल्ड ई टी एफ को पूरे भारत में एक ही कीमत पर बेचा और खरीदा जा सकता है।
  • कहां से खरीदा जाए:
    गोल्ड ई टी एफ को डीमैट और ट्रेडिंग अकाउन्ट के द्वारा, ब्रोकर की मदद से स्टॉक एक्स्चेन्ज से खरीदा जा सकता है। इसमें ब्रोकरेज फ़ीस और आपके द्वारा ETF का इतिहास ई टी एफ को खरीदने और बेचने के दौरान फन्ड मैनेजमेन्ट के कुछ शुल्क लगते हैं।
  • क्या किसी प्रकार की कोई रिस्क है:
    गोल्ड ETF का इतिहास ETF का इतिहास ई टी एफ को स्टॉक एक्स्चेन्ज में ट्रेड किया जाता है इसीलिए इनमें इन्वेस्ट करना बड़ा ही सुरक्षित होता है, साथ ही यह आपके इन्वेस्टमेन्ट पोर्टफोलियो में आवश्यक वेरियेशन्स भी लाने में मदद करता है। जब भी गोल्ड के दाम बढ़ते हैं तब इन्वेस्टर के लिये रिस्क होता है, इसीलिए आपका अपने इन्वेस्टमेंट एडवाइज़र की सल्लाह लेना आवश्यक है। गोल्ड ई टी एफ आपको इस रिस्क को कम करने में मदद करता है। इसकी गतिविधियाँ पर सिक्युरिटीज़ एक्स्चेन्ज बोर्ड ऑफ इन्डिया (एस ई बी आय) द्वारा नियंत्रित किया जाता है और इसी वजह से गोल्ड इन्वेस्टमेन्ट से संबंधित रिस्क कम हो जाती है। फन्ड हाउसेस द्वारा खरीदे जाने वाले गोल्ड का नियमित ऑडिट सरकारी एजेन्सियों द्वारा भी किया जाता है।

क्या यह मेरे लिये है?
यदि आप ऎसे व्यक्तियों में से हैं जिन्हें संचयन की समस्या के कारण फ़िज़िकल गोल्ड में इन्वेस्ट नहीं करना है और आपको इस इन्वेस्टमेन्ट में टैक्स के लाभ भी चाहिये, तब यह आपके लिये है। इसके अलावा आप सिर्फ एक बटन के क्लिक पर अपनी ई टी एफ को बेच और खरीद सकते हैं।

क्या अब भी आप यह सोच रहे हैं कि गोल्ड ई टी एफ एक बेहतरीन इन्वेस्टमेन्ट टूल क्यों है?

  • अगर आप गोल्ड में ई टी एफ के ज़रिए निवेश करना चाहते हैं तो इस बात की पुष्टि कर लें कि वह पूरी तरह से फ़िज़िकलि बैक्ड ई टी एफ है। आप कम से कम एक युनिट भी खरीद सकते हैं, जो एक ग्राम है।
  • आपको किसी प्रकार का प्रीमियम या मेकिंग चार्जेस नहीं देने होते, इसलिये आपका पैसा बचेगा यदि आपकी इन्वेस्टमेन्ट बड़ी भी है।
  • आपके गोल्ड की प्योरिटी की एकदम गारंटी होती है और हर युनिट के साथ हाय प्योरिटी के फ़िज़िकल गोल्ड का आश्वासन होता है।
  • पारदर्शी और रियल टाईम गोल्ड प्राईज़ेस।
  • आप स्टॉक एक्स्चेन्ज में लिस्ट और ट्रेड कर सकते हैं।
  • यह गोल्ड को अपने साथ रखने का एक टैक्स एफिशियन्ट तरीका है जिससे प्राप्त आय को लॉन्ग टर्म कैपिटल ETF का इतिहास गेन माना जाता है। आपको टैक्स के लाभ मिल सकते हैं जैसे वैल्थ टैक्स, सिक्युरिटी ट्रांज़ैक्शन टैक्स, वैट तथा सेल्स टैक्स से छुटकारा।
  • यह सुरक्षित है क्योंकि डीमैट होल्डिंग में चोरी का कोई डर नहीं होता और आपको किसी प्रकार के लॉकर के चार्जेस नही देने होते।
  • ई टी एफ को लोन के एवज़ में कोलैटरल के रुप में भी स्वीकार किया जाता है।
  • गोल्ड ई टी एफ के लिये कोई एन्ट्री और एग्ज़िट लोड नहीं होता।

म्यूच्यूअल फण्ड इन्वेस्टमेंट्स, मार्किट रिस्क्स की विषय वस्तु हैं, कृपया निवेश करने से पहले सभी दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें।

इसे रिडीम कैसे किया जाता है?
गोल्ड ई टी एफ को डीमैट और ट्रेडिंग अकाउन्ट के द्वारा, ब्रोकर की मदद से स्टॉक एक्स्चेन्ज से बेचा जा सकता है। आप भले ही ई टी एफ में इन्वेस्ट करते समय फ़िज़िकल गोल्ड भी साथ होता है, लेकिन याद रखिये कि गोल्ड की प्राईज़ का सबसे ज़्यादा फ़ायदा फ़िज़िकल गोल्ड लेने के बजाय ई टी एफ टूल का उपयोग करने में होता है। इसलिए जब आप इसे लिक्विडेट करते हैं, तब आपके ई टी एफ में मौजूद गोल्ड की स्थानीय मार्केट प्राईज़ के मूल्य की नकद राशि मिलती है। यदि आपके पास ई टी एफ में एक किलो या उसके समकक्ष गोल्ड होता है, तब असेट मैनेजमेन्ट कंपनियां आपको अपने ई टी एफ को फ़िज़िकल गोल्ड में बदलने की अनुमति दे सकती है।

रूस-यूक्रेन में जंग के बीच खुला निवेश का नया विकल्प, 16 मार्च तक लगा सकते हैं पैसा

यह एक ऐसे निवेशक के लिए एक अच्छा विकल्प है जो अत्यधिक अस्थिर बाजार में न्यूनतम जोखिम के साथ ज्यादा मुनाफा कमाने की तलाश में है.

रूस-यूक्रेन में जंग के बीच खुला निवेश का नया विकल्प, 16 मार्च तक लगा सकते हैं पैसा

रूस और यूक्रेन (Russia Ukraine War) में जारी जंग के बीच निवेश का नया विकल्प खुला है. मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी (Motilal Oswal AMC) ने लो-वोलैटिलिटी फैक्टर-आधारित एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) और इंडेक्स फंड (Index Fund) लॉन्च करने की घोषणा की. मोतीलाल ओसवाल एएमसी मोतीलाल ओसवाल एसएंडपी बीएसई लो वोलैटिलिटी ईटीएफ (Motilal Oswal SP BSE Low Volatility ETF) और मोतीलाल ओसवाल एसएंडपी बीएसई लो वोलैटिलिटी इंडेक्स फंड लॉन्च (Motilal Oswal SP BSE Low Volatility Index Fund) पेश करेगी. यह एक ओपन-एंडेड स्कीम है. यह SP BSE Low Volatility Total Return Index को ट्रैक करेगी. लो वोलैटिलिटी स्ट्रैटेजी में ऐसे स्टॉक्स खरीदना शामिल है जिनमें पिछले ETF का इतिहास रिटर्न के आधार पर प्राइस मूवमेंट में ज्यादा स्थिरता हो.

मोतीलाल ओसवाल एसएंडपी बीएसई लो वोलैटिलिटी ईटीएफ और मोतीलाल ओसवाल एसएंडपी बीएसई लो वोलैटिलिटी इंडेक्स फंड का न्यू फंड ऑफर (NFO) 4 मार्च से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है. इसमें आप 16 मार्च तक निवेश कर सकेंगे. SP BSE लो वोलैटिलिटी इंडेक्स 30 सबसे कम वोलेटाइल कंपनियों का चयन करता है जैसा कि इंडेक्स मेथडोलॉजी में परिभाषित किया गया है. घटकों को एक वर्ष के न्यूनतम लिस्टिंग इतिहास के साथ एसएंडपी बीएसई लार्ज मिडकैप इंडेक्स का हिस्सा होना चाहिए. स्टॉक का अधिकतम भार 5 फीसदी कैप किया गया है और इंडेक्स मार्च और सितंबर में रिबैलेंस हो जाता है.

SP बीएसई लो वोलैटिलिटी टोटल रिटर्न इंडेक्स ने किया बेहतर प्रदर्शन

फंड हाउस के ETF का इतिहास ETF का इतिहास मुताबिक, एसएंडपी बीएसई लो वोलैटिलिटी टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) ने पिछले 15 वर्षों में एसएंडपी बीएसई लार्जमिडकैप टीआरआई से काफी बेहतर प्रदर्शन किया है. इंडेक्स ने पिछले 16 कैलेंडर वर्षों में से नौ में एसएंडपी बीएसई लार्जमिडकैप टीआरआई से बेहतर प्रदर्शन किया है. निफ्टी 50 की तुलना में एसएंडपी बीएसई लो वोलैटिलिटी टीआरआई मार्केट क्रैश के दौरान कम गिरती है.

मोतीलाल ओसवाल एएमसी के एमडी और सीईओ नवीन अग्रवाल ने कहा, मोतीलाल ओसवाल एसएंडपी बीएसई लो वोलैटिलिटी इंडेक्स फंड एक ऐसे निवेशक के लिए एक अच्छा बेहतर है जो अत्यधिक अस्थिर बाजार में न्यूनतम जोखिम के साथ ज्यादा मुनाफा कमाने की तलाश में है.

28 फरवरी 2022 तक एशिया इंडेक्स प्राइवेट लिमिटेड के पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, एसएंडपी बीएसई लो वोलैटिलिटी टीआरआई (+16.ETF का इतिहास 5%) के औसत तीन साल के रोलिंग रिटर्न ने एसएंडपी बीएसई लार्जमिडकैप टीआरआई (+11.3%) से 5.2 फीसदी बेहतर प्रदर्शन किया है.

इंडेक्स कम्पोजिशन के संदर्भ में शीर्ष 10 शेयरों में एसएंडपी बीएसई लो वोलैटिलिटी इंडेक्स वेट का लगभग 39.3 फीसदी हिस्सा है. मैक्रो-इकोनॉमिक सेक्टर कवरेज में उपभोक्ता 45.9% है. इसके बाद हेल्थकेयर (16.6%), फाइनेंशियल सर्विसेज (8.9%), आईटी (7.5%), कमोडिटी (6.6%), मैन्युफैक्चरिंग (5.4%), एनर्जी (5.7%) और यूटिलिटीज (3.3%) है.

मोतीलाल ओसवाल एएमसी के पैसिव फंड के प्रमुख प्रतीक ओसवाल ने कहा, शोध से पता चला है कि लो वोलैटिलिटी वाले शेयरों को खरीदने की रणनीति लंबी अवधि में व्यापक बाजार से बेहतर प्रदर्शन करती है.

Gold ETF Investment: अक्‍टूबर में गोल्‍ड ईटीएफ में निवेश 35 फीसदी घटा, 384 करोड़ रुपये हुआ इनफ्लो

अक्टूबर महीने में गोल्ड ईटीएफ में निवेश 35 फीसदी घट गया है. अक्टूबर में 384 करोड़ रुपये का इन्फ्लो हुआ है.

Published: November 11, 2020 11:28 AM IST

Gold ETF Investment: अक्‍टूबर में गोल्‍ड ईटीएफ में निवेश 35 फीसदी घटा, 384 करोड़ रुपये हुआ इनफ्लो

Gold ETF Investment: गोल्‍ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में अक्टूबर में 384 करोड़ रुपये का इनफ्लो हुआ. यह पिछले महीने के मुकाबले 35 फीसदी कम है. यह आंकड़ा बताता है कि निवेशक अब सोने के बजाय सीधे शेयरों में निवेश को तरजीह दे रहे हैं.

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यह आंकड़ा लगातार सातवें महीने गोल्‍ड ईटीएफ में कुल निवेश को भी बताता है. हालांकि, गोल्‍ड ईटीएफ में निवेश की रफ्तार जुलाई से ही घट रही है. म्यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन एम्‍फी के आंकड़ों के मुताबिक, गोल्‍ड ईटीएफ में जुलाई में 922 करोड़ रुपये, अगस्त में 908 करोड़ रुपये, सितंबर म ..

ताजा पूंजी प्रवाह के साथ शुद्ध रूप से गोल्‍ड ईटीएफ में निवेश जनवरी से अक्टूबर के दौरान आठ महीनों में 6,341 करोड़ रुपये रहा. स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी फायर्स के रिसर्च हेड गोपाल केवलीरेड्डी ने कहा, ”वैसे तो नेट इनफ्लो सकारात्मक बना हुआ है. लेकिन, उसकी गति कम हुई है. इस ट्रेंड की तुलना शेयर बाजारों के रुख से की जा सकती है. आर्थिक गतिविधियां बढ़ने, शेयर बाजारों में तेजी, अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के साथ अनिश्चितता खत्म होने और कोरोना वायरस टीके आने की उम्मीद से निवेशक जोखिम ले रहे हैं और सीधे शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं.”

सोने को सुरक्षित निवेश का माध्यम माना जाता है. यह अन्य एसेट में निवेश के जोखिम से बचाव करता है. हालांकि, ऐसा लगता है कि फिलहाल लोग इसमें निवेश को तरजीह नहीं दे रहे हैं.

गोपाल ने बताया, ”पिछले साल और 2020 की पहली छमाही शानदार रही. लेकिन, अब पूंजी प्रवाह शेयर बाजारों में शिफ्ट हो गया है.” गोल्‍ड ईटीएफ के एयूएम अक्टूबर के अंत में 13,862 करोड़ रुपये रहे जो सितंबर के अंत में 13,622 करोड़ रुपये थे.

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