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ADR क्या है

ADR क्या है
गोवा में बीजेपी और कांग्रेस ही मुख्य पार्टी हैं

Gujarat Election: आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों के जीतने की संभावना दोगुनी, ADR का विश्लेषण

गुजरात में 2004 से हुए चुनावों के एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स द्वारा किए गए एक विश्लेषण से पता चलता है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के जीतने की संभावना उन उम्मीदवारों की तुलना में अधिक है जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है.

Gujarat Election 2022: गुजरात विधानसभा चुनाव (Gujarat Assembly Election) से पहले एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसे जानकर राजनीति में गैर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को झटका लग सकता है. दरअसल, गुजरात में 2004 से हुए चुनावों के एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा किए गए एक विश्लेषण से पता चलता है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के जीतने की संभावना उन उम्मीदवारों की तुलना में ADR क्या है अधिक है जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है.

किसके जीत की कितनी संभावना?

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक विश्लेषण में उन उम्मीदवारों की जीत की संभावना 20 फीसदी रही है जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. जबकि साफ रिकॉर्ड वाले लोगों की जीत की संभावना केवल 10 फीसदी ही माना गया है.

हालांकि बीजेपी के उम्मीदवारों के मामले में यह रिपोर्ट थोड़ा अलग है. पार्टी के हिसाब से किए गए विश्लेषण में बीजेपी एकमात्र ऐसी पार्टी रही है, जिसके खिलाफ आपराधिक मामलों वाले और बिना आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों के लिए जीतने की संभावना लगभग समान थी.

क्या कहता है कांग्रेस के उम्मीदवारों का विश्लेषण?

कांग्रेस पार्टी की बात करें तो आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों के जीतने की 38% संभावना थी और स्वच्छ रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों के 33% संभावना थी. विश्लेषण से संकेत मिलता है कि 44% सांसद और विधायक जो स्नातक और उससे ऊपर तक पढ़े थे और 52% जिन्होंने 12वीं या उससे कम तक की पढ़ाई की थी, उन पर आपराधिक मामले दर्ज ADR क्या है थे.

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नेताजी ने मिलकर रिकॉर्ड बनाया है! गोवा में 5 साल में 60% नेताओं ने बदली पार्टी, ऐसा अब तक किसी राज्य में ADR क्या है नहीं हुआ: ADR रिपोर्ट

एडीआर की रिपोर्ट कहती है कि वर्तमान विधानसभा(2017-2022) में 24 विधायकों ने ADR क्या है पार्टी बदली है जो कि कुल विधायकों की संख्या का 60 प्रतिशत है. देश में अब तक ऐसा नहीं हुआ है. ये दिखाता है कि ये जनादेश का सीधा अपमान है.

गोवा में बीजेपी और कांग्रेस ही मुख्य पार्टी हैं

गोवा में बीजेपी और कांग्रेस ही मुख्य पार्टी हैं

gnttv.com

  • पणजी,
  • 22 जनवरी 2022,
  • (Updated 28 ADR क्या है जनवरी 2022, 12:39 PM IST)

एडीआर की रिपोर्ट कहती है कि नेताओं ने जनादेश का अपमान किया

40 सीटों वाले गोवा में 5 साल में 24 विधायकों ने पार्टी बदल ली

गोवा में नेताओं ने मिलकर एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया है जो अब तक किसी राज्य में नहीं हुआ है. ऐसा हम नहीं एडीआर की रिपोर्ट कह रही है. पिछले 5 सालों में 60% नेताओं ने पार्टी बदल ली है. 40 विधानसभा सीटों वाले राज्य गोवा में पिछले 5 सालों में 24 विधायकों ने पाला बदला है. एडीआर की रिपोर्ट में यह सामने आया है कि ऐसा अब तक पहले किसी राज्य में नहीं हुआ. यह भारतीय लोकतंत्र में अपने आप में एक इतिहास है. बता दें कि इस बार गोवा में 14 फरवरी को मतदान होना है.

नेताओं ने किया जनादेश का अपमान
एडीआर की रिपोर्ट कहती है कि वर्तमान विधानसभा(2017-2022) में 24 विधायकों ने पार्टी बदली है जो कि कुल विधायकों की संख्या का 60 प्रतिशत है. देश में अब तक ऐसा नहीं हुआ है. ये दिखाता है कि ये जनादेश का सीधा अपमान है. अपने स्वार्थ में नेताओं ने नैतिकता और अनुशासन को ताक पर रख दिया है.

रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है कि 24 विधायकों की सूची में विश्वजीत राणे, सुभाष शिरोडकर और दयानंद सोपटे के नाम शामिल नहीं हैं, जिन्होंने 2017 में कांग्रेस विधायकों के रूप में इस्तीफा दे दिया था और अपने टिकट पर चुनाव लड़ने से पहले सत्तारूढ़ बीजेपी में शामिल हो गए थे. 2019 में कांग्रेस के दस विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे. इनमें विपक्ष के तत्कालीन नेता चंद्रकांत कावलेकर भी शामिल थे.

टीएमसी और आप की वजह से रोचक हो गया गोवा का चुनाव
गोवा में इस बार विधानसभा चुनाव होने जा रहा है और तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की एंट्री से यहां की राजनीति दिलचस्प हो गई है. केजरीवाल और ममता बनर्जी ने यहां पूरी ताकत झोंक दी है. 2017 में हुए विधानसभा चुनाव की बात करें तो 40 सीटों वाले गोवा में कांग्रेस 17 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी. लेकिन, कांग्रेस सरकार बनाने में नाकाम रही. भाजपा ने 13 सीटें जीती थी. भाजपा ने कुछ निर्दलीय और क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन कर सरकार बना ली थी. वर्तमान में गोवा में भाजपा की ही सरकार है.

बिहार सरकार के 23 मंत्री दागी: इन पर क्रिमिनल केस, इनमें 17 के खिलाफ गंभीर मामले; ADR ने शपथपत्रों से किया विश्लेषण

बिहार की नई महागठबंधन सरकार के 23 मंत्रियों (72 प्रतिशत) के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। इनमें से 17 पर गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। 16 अगस्त को सरकार के पुनर्गठन के बाद एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच ने बिहार विधानसभा 2020 से मुख्यमंत्री सहित सभी 33 में से 32 मंत्रियों के शपथ पत्रों के विश्लेषण के बाद यह रिपोर्ट जारी की है।

जदयू ने मनोनीत एमएलसी अशोक चौधरी को भी मंत्री बनाया है, इसे में उन्हें शपथ पत्र जमा करने की आवश्यकता नहीं है, लिहाजा वित्तीय, आपराधिक एवं अन्य विवरणों को लेकर उनकी जानकारी सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध नहीं है।

ADR के अनुसार यह विश्लेषण 2020 के विधानसभा चुनाव, विधान परिषद चुनाव और उसके बाद हुए उप चुनाव में उम्मीदवारों द्वारा दिए गए शपथ पत्रों पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार 23 मंत्रियों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। वहीं 17 ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज बताए हैं।

समीर महासेठ सबसे अमीर, मुरारी गौतम सबसे गरीब
नए मंत्रिमंडल के सबसे अधिक संपत्ति घोषित करने वाले मंत्री मधुबनी से राजद के टिकट पर जीतकर आए समीर कुमार महासेठ हैं। इन्होंने 24.45 करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की है। वहीं कांग्रेस के मुरारी प्रसाद गौतम ने सबसे कम 17.66 लाख रुपए की संपत्ति घोषित की है। कुल 23 मंत्रियों ने अपनी देनदारी घोषित की है।

8 मंत्री ने की 8वीं से 12वीं के बीच पढ़ाई
नए मंत्रियों में 8 ने अपनी शैक्षणिक योग्यता 8वीं से 12वीं के बीच घोषित की है। वहीं 24 मंत्रियों ने अपनी शैक्षणिक योग्यता स्नातक और उससे ऊपर घोषित की है।

53 फीसदी मंत्री 30 से 50 वर्ष के बीच: 17 मंत्रियों ने अपनी उम्र 30 से 50 वर्ष के बीच घोषित की है। जबकि 15 की आयु 51 से 75 वर्ष के बीच है। 32 मंत्रियों में 3 महिला मंत्री हैं।

एडीआर की रिपोर्ट : यूपी में 40 प्रतिशत एमएलसी के खिलाफ आपराधिक मामले

ADR Report उत्तर प्रदेश की 36 सीटों के लिए हाल ही में हुए 'विधान परिषद' के चुनाव में करीब 40 फीसदी सदस्य आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स(एडीआर) द्वारा बुधवार को जारी रिपोर्ट के ADR क्या है अनुसार, विश्लेषण किए गए 35 एमएलसी में से 14 एमएलसी ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं।

UP assembly एडीआर की रिपोर्ट : यूपी में 40 प्रतिशत एमएलसी के खिलाफ आपराधिक मामले

उत्तर प्रदेश की 36 सीटों के लिए हाल ही में हुए 'विधान परिषद' के चुनाव में करीब 40 फीसदी सदस्य आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स(एडीआर) द्वारा बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषण किए गए 35 एमएलसी में से 14 एमएलसी ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। जानकारी के मुताबिक, 9 एमएलसी पर हत्या, हत्या की कोशिश, रिश्वत आदि से संबंधित मामलों सहित गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 3 एमएलसी के खिलाफ हत्या यानी आईपीसी की धारा-302 से संबंधित मामले दर्ज हैं। चार एमएलसी ने हत्या के प्रयास (आईपीसी धारा-307) के मामले घोषित किए हैं।

बीजेपी के 33 एमएलसी में से 13 के खिलाफ आपराधिक मामले हैं, जबकि दो निर्दलीय विधायकों में से एक ने अपने हलफनामे में अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। इस बीच, 7 एमएलसी ने अपनी शैक्षणिक योग्यता 8वीं पास और 12वीं पास के बीच घोषित की है, जबकि 28 एमएलसी ने स्नातक या उससे ऊपर की शैक्षणिक योग्यता घोषित की है।

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संपत्ति के मामले में भी आगे

जानकारी के मुताबिक, 35 नवनिर्वाचित एमएलसी में से 33 करोड़पति हैं। भाजपा के 33 एमएलसी और दो निर्दलीय एमएलसी ADR क्या है ने 1 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति घोषित की है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में एमएलसी की संपत्ति का औसत 17.39 करोड़ रुपए है। इस बीच, 7 एमएलसी ने अपनी शैक्षणिक योग्यता 8वीं पास और 12वीं पास के बीच घोषित की है, जबकि 28 एमएलसी ने स्नातक या उससे ऊपर की शैक्षणिक योग्यता घोषित की है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में कुल 100 सीटें हैं।

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