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हर दिन बाजार विश्लेषण

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'सेंसेक्स'

Sensex, Nifty today: आज ऑटो, तेल और गैस सहित बैंकिंग सेक्टर में 0.5-1 फीसदी की तेजी देखी गई. वहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स का कारोबार सपाट नोट पर समाप्त हुआ.

Share Market Updates : मंगलवार को सेंसेक्स 158.85 अंक चढ़कर 61,783 पर और निफ्टी 49 अंक की बढ़त के साथ 18,378.15 के लेवल पर खुला. हालांकि, दोनों बेंचमार्क इंडेक्स उतार-चढ़ाव के बाद निचले स्तर पर कारोबार कर रहे थे.

Sensex-Nifty Today: आज के कारोबार के अंत में बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 170.89 अंक यानी 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 61,624.15 अंक पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी कारोबार के अंत में 20.55 अंक यानी 0.11 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 18,329.15 अंक था.

आज सुबह 11:20 बजे के करीब सेंसेक्स 0.18% के नुकसान के साथ 61,672.90 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है जबकि निफ्टी 0.07 फीसदी की गिरावट के साथ 18,45.25 पर कारोबार करता दिख रहा है. सेंसेक्स की कंपनियों में पावर ग्रिड, टाटा स्टील, कोटक महिंद्रा बैंक, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा और अल्ट्राटेक सीमेंट लाभ में थे.

आज के कारोबार के अंत में प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स 1,181.34 अंक या 1.95 प्रतिशत बढ़कर 61,795.04 पर बंद हुआ. वहीं, उतार-चढ़ाव वाले सत्र में निफ्टी 321.50 अंक या 1.78 प्रतिशत की तेजी के साथ 18,349.70 पर बंद हुआ।

बृहस्पतिवार की बात करें तो लगातार दूसरे दिन गिरावट रही और बीएसई सेंसेक्स 420 अंक लुढ़ककर 61,000 अंक के नीचे बंद हुआ था. वैश्विक स्तर पर बिकवाली दबाव के बीच वाहन, वित्त और ऊर्जा कंपनियों में बिकवाली से बाजार नुकसान में रहा था.

भारतीय शेयर मार्केट ने गुरुवार को गोता लगाया. जहां बीएसई सेंसेक्‍स 419.85 अंक टूटकर 60, 613.70 अंक पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी 128.80 अंक की गिरावट के साथ 18,028.20 अंक पर बंद हुआ. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 280.36 अंक टूटकर 60, 753.19 अंक पर आया था जबकि निफ्टी 87.35 अंक की गिरावट के साथ 18,069.65 अंक पर कारोबार कर रहा था.

सेंसेक्स में डॉ. रेड्डीज का शेयर शुरुआती कारोबार में 1.53 प्रतिशत चढ़ गया. नेस्ले इंडिया, एचसीएल टेक, इंफोसिस, इंडसइंड बैंक, एलएंडटी और आईटीसी के शेयर भी लाभ में थे. दूसरी ओर, टेक हर दिन बाजार विश्लेषण महिंद्रा, एचडीएफसी, बजाज फाइनेंस, एचयूएल तथा पॉवर ग्रिड के शेयर नुकसान में कारोबार कर रहे थे.

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 362.24 अंक या 0.59 प्रतिशत के लाभ से 61,312.60 अंक पर पहुंच गया.

सेंसेक्स सोमवार को 786.74 अंक या 1.31 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,746.59 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 225.40 अंक या 1.27 फीसदी की बढ़त के साथ 18,012.20 पर बंद हुआ.

शेयर मार्केट: सप्ताह में कारोबार के दूसरे दिन बाजार में रही बढ़त, सेंसेक्स 167 अंक और निफ्टी 55 पॉइंट ऊपर बंद हुआ

सप्ताह में आज मंगलवार को कारोबार के दूसरे दिन बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। सुबह सेंसेक्स 421.76 अंक ऊपर और निफ्टी 138.45 पॉइंट ऊपर खुला। दिनभर की ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स 710 अंक तक ऊपर जाने में कामयाब रहा। वहीं, निफ्टी भी 207 अंक से ज्यादा ऊपर पहुंचने में कामयाब रहा।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 167.19 अंक या 0.56% ऊपर 30,196.17 पर और निफ्टी 55.85 पॉइंट या 0.63% ऊपर 8,879.10 पर बंद हुआ। इससे पहले सोमवार को कारोबार के पहले दिन बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ था। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1068.75 अंक नीचे 30,028.98 पर और निफ्टी 313.60 पॉइंट नीचे 8,823.25 पर बंद हुआ था।

बीएसई टेलीकॉम कंपनियों के शेयरों में बढ़त

कंपनीबढ़त (%)
भारती एयरटेल11.34 %
आइडिया16.92 %
ऑप्टिमस इन्फ्राकॉम3.75 %
भारती इंफ्राटेल5.38 %
स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज3.27 %

बीएसई पर करीब 51 फीसदी कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही

  • बीएसई का मार्केट कैप 119 लाख करोड़ रुपए रहा
  • 2,459 कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग हुई। इसमें 1,029 कंपनियों के शेयर बढ़त में और 1,261 कंपनियों के शेयर में गिरावट रही
  • 35 कंपनियों के शेयर 1 साल के उच्च स्तर और 129 कंपनियों के शेयर एक साल के निम्न स्तर पर रहे
  • 199 कंपनियों के शेयर में अपर सर्किट और 249 कंपनियों के शेयर में लोअर सर्किट लगा

10.75 फीसदी की तेजी के साथ कर रहा कारोबार

मंगलवार को भारती एयरटेल के शेयर 559 रुपए प्रति शेयर पर हुई। शुरुआत से ही शेयरों में तेजी दिखी और यह 9.56 बजे 591 रुपए प्रति शेयर के स्तर के स्तर को पार कर गया। हालांकि, इसके बाद थोड़ी नरमी देखी गई। करीब 10 मिनट के कारोबार के बाद से यह लगातार 585 रुपए प्रति शेयर के उपर कारोबार कर रहा है। दिनभर की ट्रेडिंग के दौरान इसमें 10.75 फीसदी उछाल देखने को मिली। इस तेजी के साथ ही बीएसई में भारती एयरटेल का मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 3.20 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है।

दुनियाभर के बाजार बढ़त के साथ बंद हुए

सोमवार को भले ही भारतीय बाजार गिरावट के साथ बंद हुए, लेकिन दुनियाभर के दूसरे बाजारों में बढ़त रही। अमेरिकी बाजार डाउ जोंस 3.85 फीसदी की बढ़त के साथ 911.95 अंक ऊपर 24,597.40 पर बंद हुआ। वहीं, अमेरिका के दूसरे बाजार नैस्डैक 2.44 फीसदी बढ़त के साथ 220.27 अंक ऊपर 9,234.83 पर बंद हुआ। दूसरी तरफ, एसएंडपी 3.15 फीसदी बढ़त के साथ 90.21 पॉइंट ऊपर 2,953.91 पर बंद हुआ। चीन का शंघाई कम्पोसिट 0.56 फीसदी बढ़त के साथ 16.01 अंक ऊपर 2,891.43 पर बंद हुआ। इधर इटली, जर्मनी, फ्रांस और कनाडा के बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए।

कोरोना से देश और दुनिया में मौतें

देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1,00,328 हो गई है। इनमें 57,933 की रिपोर्ट पॉजीटिव है। वहीं 39,233 संक्रमित ठीक हो गए हैं। देश में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 3,156 हो चुकी है। ये आंकड़े covid19india.org के अनुसार हैं। दूसरी तरफ, दुनियाभर में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 4,891,015 हो चुकी है। इनमें 320,134 की मौत हो चुकी है। अमेरिका में कोरोना से मरने वालों की संख्या 91,981 हो चुकी है।

क्लोजिंग बेल: सेंसेक्स 167.19 अंक ऊपर 30,196.17 पर और निफ्टी 55.85 पॉइंट ऊपर 8,879.10 पर बंद हुआ।
03:12 PM बीएसई सेंसेक्स 30 में शामिल 21 कंपनियों के शेयरों में बढ़त और 9 कंपनियों के शेयरों में गिरावट है।

02:35 PM

बीएसई सेंसेक्स बैंकेक्स में शामिल अब 4 कंपनियों के शेयरों में बढ़त और 9 के शेयरों में गिरावट है।

02:05 PM

सेंसेक्स 221.37 अंक ऊपर 30,250.35 पर और निफ्टी 77.15 पॉइंट ऊपर 8,900.40 पर कारोबार कर रहा है।
01:30 PM आज निफ्टी 138.45 अंक ऊपर खुला। अभी ये 156.30 पॉइंट ऊपर 8,979.55 पर कारोबार कर रहा है। इसमें 1.77% की बढ़त है।

12:54 PM

बीएसई सेंसेक्स 30 में शामिल 29 कंपनियों के शेयरों में बढ़त है; भारती एयरटेल के शेयर में सबसे ज्यादा 9.65% की बढ़त है।

11:06 AM

बीएसई सेंसेक्स ऑटो में शामिल सभी 16 कंपनियों के शेयरों में बढ़त है; टाटा मोटर्स के शेयर में 5.27 फीसदी बढ़त है।

अक्षय तृतीया पर चमक सकता है सोना बाजार

अक्षय तृतीया

नयी दिल्ली। कोविड महामारी और लॉकडाउन के असर से करीब-करीब बाहर निकल चुकी भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों के बीच बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि इस बार मंगलवार को अक्षय तृतीया पर्व पर सोने की मांग में अच्छी तेजी रहेगी और मांग कोविड के पहले के स्तर को पार कर सकती है।

यूक्रेन संकट के बाद महंगी धातुओं के बाजार में फिर से तेजी दिख रही है। साथ ही मुद्रास्फीति का भी दबाव बढ़ा है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंसियल सर्विसेस ने अक्षय तृतीया की पूर्व संध्या पर जारी एक विश्लेषण में कहा है कि वर्ष 2022 की शुरुआत से उच्चतर कीमतों के बीच बाजार के भागीदार, विशेषकर घरेलू मोर्चे पर भौतिक धातु खरीदने से परहेज करते रहे हैं। फर्म के विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि भारत में लोग शादियों, जन्मदिन और धार्मिक त्यौहारों को सोना खरीदने के तीन सबसे महत्वपूर्ण अवसर मानते हैं।

बाजार परामर्श कंपनी मेलवुड केन इंटरनेशनल के संस्थापक एवं सीईओ नीश भट्ट ने कहा, "अक्षय तृतीया के अवसर पर भारत में लोग सोना खरीदना शुभ मानते हैं और हमें इस पर्व पर सोने की मांग में उछाल दिखता है।"

मेलवुड केन के विश्लेषण के अनुसार पिछले साल सोने की कीमतों में 06 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। हाल में यूक्रेन संकट के बीच भू-राजनैतिक तनाव के दौर में सोने में तेजी आयी है। लेकिन अमेरिका में मुद्रास्फीति के दबाव के कारण वहां फेडरल रिर्जव द्वारा ब्याज बढ़ाए जाने से अमेरिकी बॉन्ड बाजार में निवेश प्रतिफल बढ़ने तथा डालर के मजबूत होकर 20 माह के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से सोने की कीमतों पर दबाव है।

श्री भट्ट ने कहा कि लॉकडाउन खुलने के बाद सोने की मांग इसबार अक्षय तृतीया पर महामारी से पहले के स्तर को पार कर सकती है। उन्होंने कहा, "भारतीयों का सोने के प्रति लगाव जगजाहिर है और भारत दुनिया का सबसे बड़ा स्वर्ण बाजार है और यहां सोना संपत्ति सृजन का शताब्दियों से स्त्रोत रहा है। यह मुद्रास्फीति से बचाव की एक ढाल भी है और उतार-चढ़ाव के दौर में सुरक्षित निवेश का माध्यम भी है।"

मोतीलाल फाइनेंसियल सर्विसेस के विश्लेषण में कहा गया है, "चूँकि समृद्धि का मौसम, अक्षय तृतीया करीब है।. पिछले कुछ वर्षों में सोने के भाव को प्रभावित करने वाले अनेक घटक रहे हैं जिनमें वैश्विक महामारी सबसे बड़े घटकों में से एक है। लेकिन अभी के बाद से सोने के भाव का क्या रुख रहेगा, इसका अनुमान लगाने के लिए तीन प्रमुख घटकों – भू-राजनैतिक तनाव, महंगाई संबंधी चिंताओं, और केन्द्रीय बैंक की नीतियों - पर ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।"

इस विश्लेषण के अनुसार, "यूक्रेन-रूस युद्ध से उत्पन्न भू-राजनैतिक तनाव और चीन में कोविड के बढ़ते मामलों के डर से सम्बंधित ताजा स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। बाजार के लिए बढ़ती महंगाई की चिंता पिछले साल से एक विषयवस्तु बनी हुई है, और भू-राजनैतिक तनावों ने बढ़ती कीमतों ने आग में घी का काम किया है।"

वित्तीय सेवा फर्म का मानना है कि अमेरिका में मुद्रास्फीति के लंबे समय तक ऊंचा बना रहने के बीच वहां फेडरल रिर्जव द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के अनुमान और महंगाई पर नियंत्रण के लिए हर महीने फेडरल रिजर्व की बैलेंस शीट में 95 अरब डालर की कमी किए जाने से सोने की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

पहली मई से भारत-संयुक्त अरब अमीरात व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईपीए) प्रभावी हो गया है। इसके तहत वहां से एक साल में रियायती शुल्क पर 200 टन सोना भारत में मंगाया जा सकता है। इस समझौते के तहत इस मात्रा तक आयात पर शुल्क बाकि देशों के सोने पर लगने वाले शुल्क एक प्रतिशत कम होगा।

इस रिपोर्ट में वर्ल्ड गोल्ड काउं‍सिल (डब्लूजीसी) का हवाला देते हुए कहा गया है कि मुख्यतः कीमतों में तेज उछाल के कारण इस वर्ष के पहले तीन महीनों में भारत की सोने के लिए माँग 18 प्रतिशत गिरकर 135.5 टन रही है। इसके विपरित वर्ष 2022 की पहली तिमाही में देश में पुनर्चक्रित कुल सोने में 88 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इसकी मात्रा 27.8 टन रही। भारत में 2021 की चौथी तिमाही में रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच कर जेवरों के लिए माँग सालाना 26 प्रतिशत तक गिरकर पहली तिमाही में 94 टन रही।

इसमें कहा गया है कि देश में उपभोक्ताओं के विश्वास में सुधार से सोने के बाजार में मांग में सुधार होने में मदद मिल सकती है। भारतीय रिज़र्व बैंक का उपभोक्ता विश्वास सूचकांक (कांसूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स) जनवरी में 64.4 था, जो बढ़कर मार्च में 71.7 हो गया। हालांकि इसमें यह भी कहा गया है कि अगर सोने के मूल्य में और वृद्धि - या ज्यादा अस्थिरता - होती है तो माँग को विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है, जबकि व्यापक महंगाई भी खर्च करने योग्य आमदनी को सीमित करके माँग कम कर सकती है।

विश्लेषण के अनुसार, हाजिर बाजार में सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब-करीब रिकॉर्ड ऊंचाई को छूने के बाद बिकवाली के दबाव का सामना कर रहा है लेकिन कीमतें 1900 डालर प्रति आउंस के आसपास टिकी हुयी है। हालाँकि अमरिकी केंद्रीय बैंक के आक्रामक रुख और महंगाई पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए अगली कुछ तिमाहियों के लिए सोने में कुछ नरमी दिख सकती है। आगले 12 महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 1800 से 2050 डालर के दायरे में रह सकता है। इस दौरान घरेलू बाजार में इसकी कीमतें 46500 से 55000 रुपये प्रति दस ग्राम के दायरे में घट-बढ़ सकती हैं।

पूंजी बाजार से मिलेनियल्स का परिचय, जानिए कैसे होता है निवेश

मुंबई- पिछले कुछ वर्षों में, भारतीय शेयर बाजार निवेशकों की विस्तृत श्रृंखला के निवेश से गुलजार रहा है। शेयर बाजार में निवेश में निवेशकों की अपेक्षाकृत तेजी से बढ़ती संख्या की एक असाधारण विशेषता मिलेनियल्स द्वारा निभाई गई भूमिका है। कैलेंडर वर्ष 2020 में, भारत में डीमैट खातों में 10 मिलियन से अधिक की वृद्धि हुई और इस इजाफे का मुख्य श्रेय वास्तव में युवाओं को जाता है।

इक्विटी निवेश में मिलेनियल्स की बढ़ी हुई दिलचस्पी भारत के पूंजी बाजारों को और हर दिन बाजार विश्लेषण अधिक गहरा कर सकती है, क्योंकि यह नया समूह पारंपरिक कम जोखिम, कम रिटर्न देने वाली संपत्ति के मुकाबले अपने निवेश में विविधता पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्नत तकनीकों के साथ, नए जमाने की स्टॉक ब्रोकिंग कंपनियां स्मार्ट निवेशकों का एक समुदाय बना रही हैं। एंजल वन लिमिटेड के चीफ ग्रोथ ऑफिसर, प्रभाकर तिवारी ने यहाँ उन कुछ महत्वपूर्ण कारकों का उल्लेख किया है, जो स्मार्ट निवेशकों के समुदाय को सहायता और गति प्रदान कर रहे हैं।

मिलेनियल्स नए जमाने की तकनीकों को अपनाने के प्रति मुखर हैं:

फिनटेक क्रांति के युग में, स्मार्टफोन से नियंत्रित एडवांस्‍ड और बेहतरीन एप की मदद से परिसंपत्ति प्रबंधन, निवेश, सुरक्षा विश्लेषण और पोर्टफोलियो विविधीकरण का काम पूरा किया जा सकता है। नवीनतम तकनीकों के प्रति मिलेनियल्स की ग्रहणशील प्रकृति के कारण उन्होंने अपने निवेश को आगे बढ़ाने के लिए कई नवीन तरीके खोजे हैं और जोखिम मुक्त परिसंपत्तियों के मुकाबले वे अपने निवेश को समय के साथ बढ़ाने में सफल रहे हैं।

मिलेनियल्स विश्वसनीय जानकारी के आधार पर निवेश के फैसले लेते हैं:

सुझावों पर भरोसा करने के बजाय, मिलेनियल्स निवेश निर्णय लेने से पहले जानकारी की विश्वसनीयता चाहते हैं। परिष्कृत उपकरणों (नए जमाने के ब्रोकरेज हाउसों द्वारा प्रदान किए गए) की उपलब्धता के साथ, जो मौलिक और तकनीकी विश्लेषण तक आसान पहुंच प्रदान करते हैं, निवेश निर्णय लेने की समग्र प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक तेज और अधिक विश्वसनीय हो गई है।

निवेश सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है:

पिछले एक दशक में शेयर बाजार में निवेश की पूरी प्रक्रिया में बहुत बदलाव आया है। एआई और ब्लॉकचैन ने तेज सेटलमेंट, रियल टाइम निगरानी, बेहतर जानकारी और शानदार सुरक्षा उपायों के हर दिन बाजार विश्लेषण साथ ट्रेडिंग इको-सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए बहुत सारे रास्ते खोले हैं। इसके अलावा, ब्रोकर्स द्वारा अपनाए गए संचालन की पारदर्शिता ने यह सुनिश्चित किया है कि उनके ग्राहकों को सेवाओं की सर्वोत्तम गुणवत्ता की पेशकश की जाती है। इससे नए जमाने के निवेशकों में ज्‍यादा से ज्यादा भरोसा पैदा होता है।

बाजारों, कंपनियों और शेयरों से संबंधित शोध और डेटा पहले से कहीं अधिक सुलभ है:

एनालिटिक्स के कारण सूचना और शोध की संपूर्ण उपलब्धता और गुणवत्ता में अभूतपूर्व दर से वृद्धि हुई है। मिलेनियल्स के पास अब प्राथमिक और तकनीकी विश्लेषण और ऐसी जानकारी की व्याख्या तक अप्रतिबंधित पहुंच है। इसके अलावा, कई थर्ड पार्टी सेवाओं, जैसे 1) स्मॉलकेस: स्टॉक की एक पूर्व-निर्धारित श्रृंखला, 2) स्ट्रीक: सरलीकृत तकनीकी विश्लेषण, 3) सेंसिबुल: सरलीकृत विकल्प ट्रेडिंग, को अब ब्रोकरेज हाउस ने एकीकृत किया है, जिसकी पेशकश ग्राहकों को की जाती है ताकि वे अपने संपूर्ण स्टॉक ट्रेडिंग अनुभव में सुधार करें।

लाखों मिलेनियल्स विभिन्न उपकरणों के माध्यम से भारतीय शेयर बाजारों में निवेश कर रहे हैं। निवेशकों का यह वर्ग कहीं अधिक शिक्षित है, और इक्विटी निवेश में अस्थिरता को बेहतर ढंग से समझता है। वे बाजार के बारे में अपनी जानकारी को और बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं और निवेश निर्णय लेने के लिए विश्वसनीय जानकारी प्राप्त करने के लिए उपलब्ध तकनीकों का सर्वोत्तम उपयोग करते हैं। देश में स्मार्ट निवेशकों के इस समुदाय द्वारा रिटेल निवेशकों की स्थिति को सकारात्मक रूप से मजबूत करने की उम्मीद है। साथ ही यह बिना किसी संदेह के शेयर बाजार में निवेश करने के लिए नए जमाने के निवेशकों की एक पूरी पीढ़ी तैयार कर सकता है।

1999 के बाद से, हर आम चुनाव के बाद क्यों बढ़ता है निफ्टी और सेंसेक्स?

1999 के बाद से, हर आम चुनाव के बाद क्यों बढ़ता है निफ्टी और सेंसेक्स?

पुणे: भारत के प्रमुख शेयर बाजार सूचकांकों, निफ्टी और सेंसेक्स में, पिछले छह महीनों की तुलना में 1999 और 2014 के बीच सभी चार लोकसभा चुनावों के छह महीने बाद वृद्धि देखी गई। यह जानकारी इंडियास्पेंड के विश्लेषण में सामने आई है।

पिछले चार लोकसभा चुनावों के दौरान हमने तीन प्रमुख तारीखों पर निफ्टी और सेंसेक्स के स्तर का विश्लेषण किया - मतदान के पहले दिन से छह महीने पहले(चुनाव से पहले),मतदान के पहले दिन (चुनाव के दौरान), और चुनाव के पहले दिन के छह महीने बाद (चुनाव के बाद)।

पिछले छह महीनों की तुलना में, निफ्टी और सेंसेक्स ने इनमें से प्रत्येक आम चुनाव के बाद छह महीने में औसतन 40.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की।

निफ्टी यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) फिफ्टी, 1 अप्रैल 1996 को लॉन्च किया गया था, और यह एनएसई में सूचीबद्ध 12 क्षेत्रों में 50 प्रमुख भारतीय कंपनियों के भारित औसत का प्रतिनिधित्व करता है। एसएंडपी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) सेंसिटिव इंडेक्स यानी सेंसेक्स, जो बीएसई में सूचीबद्ध 30 प्रमुख भारतीय कंपनियों का सूचकांक है, 1986 में स्थापित किया गया था।

निफ्टी की स्थापना के बाद हुए चार लोकसभा चुनावों में से दो -2004 और 2009- में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार चुन कर आई। 1999 में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ( एनडीए ) ने बहुमत से कम होने के बावजूद सरकार बनाई। 2014 में, भाजपा ने एक साधारण बहुमत जीता और सहयोगी दलों के साथ एनडीए की सरकार बनाई। सभी चार मामलों में, निफ्टी और सेंसेक्स दोनों बढ़े।

2009 के चुनावों के बाद, जब यूपीए सरकार फिर से चुनी गई, निफ्टी में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया। 16 अक्टूबर 2009 को सूचकांक 5,142 पर था, जबकि एक साल पहले इसी दिन 3,269 पर था, यानी 57.3 फीसदी की वृद्धि देखी गई है।

2009 के चुनावों के बाद सेंसेक्स ने भी चुनाव के बाद सबसे ज्यादा बढ़त देखी है - 16 अक्टूबर, 2008 को 10,581 से, 16 अक्टूबर, 2009 को 17,323 पर गया है, यानी 63.7 फीसदी की वृद्धि।

Source: National Stock Exchange & Bombay Stock Exchange Note: For 1999 data, the first day of the election is September 5, 1999. Six months pre-elections and post-elections were March 5, 1999, and March 5, 2000, respectively

निफ्टी हमेशा चुनाव से पहले और चुनावों के दौरान की तुलना में चुनाव के बाद बढ़ जाता है, यह दिसंबर 2018 की मुंबई स्थित धन प्रबंधन और निवेश बैंकिंग फर्म आनंद राठी वेल्थ सर्विसेज द्वारा जारी रिपोर्ट में भी हाईलाइट किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, एक स्थिर सरकार वांछनीय है, जिसका मतलब है कि एक राजनीतिक दल या उसके गठबंधन को बाजारों में अनुकूल प्रतिक्रिया देने के लिए बहुमत की आवश्यकता है- "लोग एक स्थिर सरकार चाहते हैं, इसलिए यदि कोई भी राजनीतिक दल या गठबंधन 543 सीटों वाली लोकसभा में 272 पार कर जाता है, चाहे वह कोई भी हो, तो हमारे पास एक स्थिर सरकार होगी। यह यूपीए या एनडीए के बहुमत से जीतने के बारे में नहीं है। यदि बाजार एक स्थिर सरकार देखता है, तो यह स्थिर नीतियों की अपेक्षाओं का निर्माण करेगा और बाजार बढ़ने लगेगा।”

आनंद राठी के एक सूत्र ने इंडियास्पेंड को बताया, हर पांच साल में, आप पाएंगे कि निफ्टी ने वास्तव में चुनावी वर्षों से 100 फीसदी रिटर्न दिया है। इसलिए, अगर पांच साल की सरकारें और स्थिर नीतियां हैं, तो बाजार में तेजी आएगी। ”

सूत्रों ने कहा कि बाजार के बढ़ने का एक कारण यह है कि कौन जीतता है, यह चुनाव भारत की खपत हर दिन बाजार विश्लेषण संचालित अर्थव्यवस्था में एक बहुत बड़ी आर्थिक घटना है। चुनावों के आसपास राजनीतिक दलों और सरकारों द्वारा खर्च किया गया बहुत सारा पैसा अंततः ग्रामीण और शहरी भारत दोनों में लोगों को जाता है।

लोग अंततः इस पैसे को खर्च हर दिन बाजार विश्लेषण करेंगे और यह खपत बढ़ाएगा। इसलिए, सूचीबद्ध कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी होने की संभावना है- “इसलिए, जो वास्तव में चुना गया है, वह कोई मायने नहीं रखता। यह ऐतिहासिक रूप से हुआ है और हम दृढ़ता से मानते हैं कि ऐसा होता रहेगा।”

सूत्र ने कहा, “(चुनावों के आसपास) आशा (एक सकारात्मक भावना) भी है कि अगले पांच सालों में कुछ अलग होने जा रहा है। एक उम्मीद है कि नई निर्वाचित सरकार नई नीतियों के साथ आएगी और इसलिए आप पाते हैं कि बाजार ऊपर जाने लगता है। "

2011 और 2018 के बीच हुए 48 राज्य विधानसभा चुनावों के भी विश्लेषण रिपोर्ट में पाया है कि 43 - या 90 फीसदी के परिणाम ने संकेत दिया कि मतदाताओं ने किसी पार्टी को वोट देने से पहले तार्किक रूप से सोचा है। रिपोर्ट कहती है कि, भारत में मतदाता सरकार के रिपोर्ट कार्ड का तार्किक रूप से आकलन करके वर्तमान सरकारों को पुरस्कृत या दंडित करते हैं।

सूत्र ने बताया कि, “हमने देखा कि लोग मजबूत नेताओं का चुनाव करने के लिए तैयार हैं। उदाहरण के लिए, पंजाब में, हमने पाया कि उस समय कई अन्य राज्यों को जीतने के बावजूद, भाजपा वहां 2017 में हार गई, क्योंकि कैप्टन अमरिंदर सिंह [अब कांग्रेस के मुख्यमंत्री] वहां एक मजबूत नेता था। इसलिए, लोगों ने केवल एक विशेष पार्टी को वोट नहीं दिया। लोग ऐसा चाहते थे जो नेतृत्व कर सके और लोगों के हितों पर काम कर पाए।

रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव परिणाम बाजारों के लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं, अगर ‘तार्किक’ या ‘अनुकूल’ परिणाम हैं। सूत्रों के मुताबिक, "वर्तमान लोकसभा चुनाव में तीन संभावित परिणाम हैं। पहला, वही सरकार है (भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए), दूसरी कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए और उसके बाद तीसरी मोर्चे की सरकार है, जिसमें एक भी पार्टी बहुमत में नहीं होगी। हम तार्किक रूप से सोचते हैं कि भाजपा फिर से चुनाव जीतेगी। हमने पाया कि इन तीन (विकल्पों) में से पहला, लोगों के लिए सबसे तार्किक है। एक मजबूत नेता की उम्मीद है।”

सूत्र ने कहा कि, "हालांकि, अगर एक तीसरा मोर्चा (महागठबंधन) सत्ता में आता है, तो यह बाजारों के लिए शुभ नहीं होगा, क्योंकि तब आपके पास मजबूत नेतृत्व नहीं होगा और साथ ही कोई स्थिर नीतियां भी नहीं होंगी। हमने इसे ऐतिहासिक रूप से देखा है। ”

अतीत में देखा गया है कि, शेयर बाजारों में चुनावों से छह महीने पहले काफी भीड़ हो जाती है, और अनुकूल परिणाम के बाद यह प्रवृति जारी रहती है । उदाहरण के लिए, 2009 में चुनाव के दौरान 12 महीने की अवधि के लिए (छह महीने पहले और मतदान शुरू होने के छह महीने बाद), हर दिन बाजार विश्लेषण बाजार ने लगभग 57 फीसदी पूर्ण प्रतिफल दिया। हालांकि, 2004 के आम चुनावों के बाद, जहां परिणाम अपेक्षित नहीं था - कांग्रेस पार्टी एक सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और एक और एनडीए सरकार की व्यापक उम्मीदों के बीच, एक यूपीए सरकार का गठन किया - चुनाव के आसपास 12 महीने की अवधि के लिए, बाजार ने 16 फीसदी पूर्ण रिटर्न दिया, जैसा कि रिपोर्ट में कहा गया है।

(रायबागी, एक डेटा विश्लेषक हैं, कार्डिफ विश्वविद्यालय में कम्प्यूटेशनल और डेटा पत्रकारिता में ग्रैजुएट हैं और इंडियास्पेंड में इंटर्न है।)

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